कैरियर मेडिकल कॉलेज में इंसानियत शर्मसार? इलाज की गुहार के बाद भी महिला की मौत, अकेला रह गया छह साल का मासूम

कैरियर मेडिकल कॉलेज लखनऊ

अस्पताल के बाहर तड़पती रही महिला, इलाज मिला होता तो शायद बच जाती जान!

आईआईएम रोड के कैरियर मेडिकल कॉलेज में इलाज के लिए पहुंची थी महिला, भर्ती न करने का आरोप; मौत के बाद भी नहीं सामने आया कोई अपना

सनी विश्राम सिंह। पत्रकार सत्ता
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में इंसानियत को झकझोर देने वाला मामला सामने आया है। आईआईएम रोड स्थित कैरियर डेंटल एवं मेडिकल कॉलेज में शनिवार को एक महिला इलाज की आस लेकर पहुंची थी। उसके साथ करीब छह साल का मासूम बच्चा था। महिला के साथ न कोई तीमारदार था और न ही बच्चा इतना समझदार कि अपनी मां का नाम-पता या घर का ठिकाना बता सके। आरोप है कि अस्पताल में भर्ती किए जाने की गुहार लगाने के बावजूद उसे इलाज नहीं मिला और शाम को उसकी मौत हो गई।

सबसे दर्दनाक तस्वीर यह है कि महिला की मौत के बाद भी उसके पास बैठा छह साल का बच्चा शायद यह तक नहीं समझ पा रहा कि उसकी मां अब इस दुनिया में नहीं है।

भर्ती करने की गुहार लगाती रही महिला

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक महिला दोपहर में अपने बच्चे के साथ अस्पताल पहुंची थी। उसकी हालत खराब थी और वह भर्ती किए जाने की गुहार लगाती रही। आरोप है कि उसके साथ कोई तीमारदार नहीं होने के कारण मेडिकल स्टाफ ने उसे भर्ती नहीं किया।

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बताया जा रहा है कि महिला अस्पताल परिसर में ही इधर-उधर बैठती रही। हालत बिगड़ने पर वह कभी गिर पड़ती तो कभी जमीन पर लेट जाती। इसके बावजूद उसे समय पर उपचार नहीं मिलने का आरोप है। शाम होते-होते महिला ने दम तोड़ दिया।

मां चली गई… मासूम को कुछ पता ही नहीं

महिला की मौत के बाद सबसे मार्मिक स्थिति उसके छह वर्षीय बच्चे की रही। मासूम के साथ अब कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जो यह बता सके कि महिला कौन थी, कहां की रहने वाली थी और उसके परिवार में कौन-कौन है।

बच्चा कुछ भी स्पष्ट नहीं बता पा रहा है। अस्पताल परिसर में मां की मौत के बाद वह असहाय स्थिति में है। यह दृश्य वहां मौजूद लोगों को भी झकझोर देने वाला था।

मौत के बाद हरकत में आया अस्पताल प्रबंधन

प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि महिला की मौत की जानकारी होने के बाद अस्पताल प्रबंधन सक्रिय हुआ और शव को अपने कब्जे में ले लिया गया। इसके बाद लोगों को शव से दूर कर दिया गया।

हालांकि महिला को जीवित रहते कथित रूप से समय पर उपचार क्यों नहीं मिला, उसे भर्ती करने से इनकार किया गया या नहीं और उसकी वास्तविक मौत किस चिकित्सकीय कारण से हुई, इन सवालों का जवाब अभी सामने नहीं आया है।

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‘पत्रकार सत्ता’ ने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क की कोशिश की

घटना की सूचना मिलने के बाद पत्रकार सत्ता के रिपोर्टर ने अस्पताल प्रबंधन से संपर्क कर मामले की जानकारी लेने का प्रयास किया, लेकिन समाचार लिखे जाने तक किसी जिम्मेदार अधिकारी से संपर्क नहीं हो सका।

समाचार लिखे जाने तक महिला के शव को लेने के लिए भी कोई परिजन सामने नहीं आया था और उसके साथ मौजूद मासूम बच्चे के परिजनों का भी पता नहीं चल सका था।

उठ रहे हैं कई गंभीर सवाल

इस घटना ने अस्पतालों में गरीब, असहाय और बिना तीमारदार पहुंचे मरीजों के प्रति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

अगर महिला की हालत वास्तव में गंभीर थी तो क्या केवल इसलिए उसे भर्ती नहीं किया जाना चाहिए था क्योंकि उसके साथ कोई तीमारदार नहीं था? क्या अस्पताल ने उसे प्राथमिक उपचार दिया? क्या उसकी मेडिकल जांच की गई? उसकी मौत का वास्तविक कारण क्या था? और सबसे बड़ा सवाल—अगर उसे समय पर इलाज मिलता तो क्या उसकी जान बच सकती थी?

इन सवालों का जवाब जांच के बाद ही सामने आएगा।

फिलहाल छह साल का वह मासूम अपनी मां को खो चुका है और शायद अभी उसे यह भी नहीं मालूम कि उसके सिर से मां का साया हमेशा के लिए उठ चुका है।

इस मामले में पुलिस, स्वास्थ्य विभाग और अस्पताल प्रबंधन की जांच से ही सच्चाई सामने आ सकेगी।

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