आजाद बोले- 1931 में जौहर का निधन, 1933 में सामने आया ‘पाकिस्तान’ का प्रस्ताव
पत्रकार सत्ता। डिजिटल डेस्क
लखनऊ । मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा मौलाना मोहम्मद अली जौहर को भारत के विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराए जाने के कथित बयान पर नगीना सांसद एवं आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर को भारत विभाजन के लिए जिम्मेदार बताना इतिहास के कालक्रम और उनके स्वतंत्रता संग्राम में योगदान को नजरअंदाज करना है।
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ संघर्ष करने वाले स्वतंत्रता सेनानी, पत्रकार, शिक्षाविद और राष्ट्रवादी नेता थे। उन्होंने अंग्रेजी शासन के खिलाफ मुखर होकर आवाज उठाई और स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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आजाद ने कहा कि मौलाना जौहर ने खिलाफत और असहयोग आंदोलनों में सक्रिय भूमिका निभाई तथा ब्रिटिश शासन के खिलाफ संघर्ष के दौरान जेल की यातनाएं भी सहीं। उन्होंने 1930 में लंदन में आयोजित प्रथम गोलमेज सम्मेलन में भारत की स्वतंत्रता और स्वशासन की मांग उठाई थी।
1931 में निधन, 1933 में सामने आया ‘पाकिस्तान’ नाम
चंद्रशेखर आजाद ने अपने बयान में इतिहास के कालक्रम को आधार बनाते हुए कहा कि मौलाना मोहम्मद अली जौहर का निधन 4 जनवरी 1931 को लंदन में हुआ था। वहीं ‘पाकिस्तान’ नाम के साथ अलग राष्ट्र की मांग का प्रसिद्ध प्रस्ताव चौधरी रहमत अली ने जनवरी 1933 में अपने ‘Now or Never’ घोषणापत्र के जरिए सामने रखा था। उपलब्ध ऐतिहासिक स्रोत भी 1933 में चौधरी रहमत अली के इस प्रस्ताव का उल्लेख करते हैं।
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इसी आधार पर आजाद ने सवाल उठाया कि 1931 में निधन हो चुके मौलाना जौहर को 1933 में सामने आए पाकिस्तान के प्रस्ताव और 1947 के विभाजन के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार कैसे ठहराया जा सकता है।
“इतिहास को राजनीतिक चश्मे से नहीं, तथ्यों से पढ़ें”
चंद्रशेखर आजाद ने कहा कि इतिहास को राजनीतिक दृष्टिकोण से देखने के बजाय तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर पढ़ा जाना चाहिए। उन्होंने मौलाना जौहर के स्वतंत्रता आंदोलन में योगदान को याद करते हुए कहा कि किसी ऐतिहासिक व्यक्तित्व की भूमिका का मूल्यांकन उसके समय और परिस्थितियों के संदर्भ में किया जाना चाहिए।
हालांकि भारत विभाजन का इतिहास कई दशकों में विकसित हुई राजनीतिक, साम्प्रदायिक और संवैधानिक परिस्थितियों से जुड़ा जटिल विषय है। इसलिए किसी एक व्यक्ति को पूरे विभाजन के लिए जिम्मेदार ठहराना इतिहास के व्यापक संदर्भ को सरल बनाकर देखने का विषय बन सकता है।
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आजाद ने अपने बयान के अंत में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर राजनीतिक कटाक्ष करते हुए कहा—“जानकारी का टोटा, बयानों की भरमार!”
चंद्रशेखर आजाद के इस बयान के बाद मौलाना मोहम्मद अली जौहर की ऐतिहासिक भूमिका और भारत विभाजन को लेकर राजनीतिक बहस एक बार फिर तेज हो गई है।




