राज्यपाल ने अनुच्छेद-161 के तहत दया याचिका अस्वीकार की
पत्रकार सत्ता ब्यूरो
लखनऊ। उत्तर प्रदेश शासन ने हरदोई निवासी बंदी दिनेश की समयपूर्व रिहाई संबंधी दया याचिका खारिज कर दी है। शासनादेश के अनुसार राज्यपाल ने संविधान के अनुच्छेद-161 के अंतर्गत प्रस्तुत याचिका पर विचार करने के बाद रिहाई से इनकार कर दिया है। यह आदेश कारागार प्रशासन एवं सुधार अनुभाग-2 द्वारा जारी किया गया।
शासनादेश में कहा गया है कि दिनेश पुत्र रामेश्वर, ग्राम नयागांव मजरा मझिगवां थाना बेनीगंज जनपद हरदोई का निवासी है। उस पर 5 जून 2010 को दहेज की मांग को लेकर पत्नी को जलाकर हत्या करने का आरोप सिद्ध हुआ था। अपर सत्र न्यायाधीश/फास्ट ट्रैक कोर्ट हरदोई ने 4 नवंबर 2016 को भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत उसे आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। मामले की अपील वर्तमान में उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ में लंबित है।
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दया याचिका समिति ने बंदी की आयु, भोगी गई सजा, अपराध की प्रकृति तथा जिला प्रशासन और पुलिस की रिपोर्ट सहित विभिन्न पहलुओं पर विचार किया। समिति ने माना कि ऐसे अपराध में समयपूर्व रिहाई से समाज में प्रतिकूल संदेश जा सकता है। हरदोई के जिलाधिकारी और पुलिस अधीक्षक ने भी रिहाई की संस्तुति नहीं की थी। इन आधारों पर समिति ने याचिका स्वीकार करने की अनुशंसा नहीं की।
इसके बाद राज्यपाल ने दया याचिका अस्वीकार कर दी और कारागार प्रशासन को आदेश दिया गया कि बंदी को इस निर्णय से अवगत कराया जाए। शासनादेश में यह भी उल्लेख है कि संबंधित अधिकारियों को आवश्यक कार्रवाई हेतु प्रतिलिपि भेजी गई है।
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