पत्रकार सत्ता | लखनऊ
उत्तर प्रदेश में प्रारंभिक कक्षाओं की पढ़ाई और शिक्षण व्यवस्था को बेहतर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के तहत लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन (LLF) ने टाटा ट्रस्ट्स और उत्तर प्रदेश राज्य शिक्षा विभाग के सहयोग से उत्तर प्रदेश टीचिंग एंड लर्निंग प्रैक्टिसेज सर्वे (TLPS) 2025 रिपोर्ट जारी की। रिपोर्ट का विमोचन सोमवार को इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान, लखनऊ में आयोजित कार्यक्रम के दौरान किया गया।
रिपोर्ट में पहली और दूसरी कक्षा के कक्षाओं में पढ़ाई के तौर-तरीकों, शिक्षकों की कार्यशैली, कक्षा के वातावरण तथा बच्चों की आधारभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक ज्ञान (FLN) को मजबूत बनाने के लिए ठोस सुझाव दिए गए हैं। रिपोर्ट का उद्देश्य शिक्षण प्रक्रिया को अधिक प्रभावी, सहभागी और बाल-केंद्रित बनाना है।
राष्ट्रीय शिक्षा नीति और निपुण भारत मिशन को मिलेगा बल
रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और निपुण भारत मिशन के लक्ष्यों को सफल बनाने के लिए केवल परीक्षा परिणामों पर नहीं, बल्कि रोज़ाना कक्षा में होने वाली शिक्षण प्रक्रिया पर भी समान रूप से ध्यान देना आवश्यक है। सर्वेक्षण के आधार पर शिक्षकों के प्रशिक्षण, शैक्षणिक सहयोग और कक्षा शिक्षण में सुधार के लिए व्यावहारिक सुझाव दिए गए हैं।
इन अधिकारियों की मौजूदगी में हुआ विमोचन
रिपोर्ट का विमोचन उत्तर प्रदेश सरकार के बेसिक एवं माध्यमिक शिक्षा विभाग के अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन (आईएएस), स्कूल शिक्षा महानिदेशक मोनिका रानी (आईएएस), एससीईआरटी निदेशक गणेश कुमार, बेसिक शिक्षा निदेशक अनिल भूषण चतुर्वेदी, समग्र शिक्षा के अपर कार्यक्रम निदेशक राजेंद्र प्रसाद, आनंद कुमार पांडेय सहित टाटा ट्रस्ट्स, यूनिसेफ, जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्थानों (DIET), शिक्षा अधिकारियों, शिक्षकों और विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधियों की उपस्थिति में किया गया।
200 स्कूलों में किया गया सर्वे
यह सर्वेक्षण नवंबर 2024 से मार्च 2025 के बीच बहराइच, बरेली, मिर्जापुर और रायबरेली के 200 सरकारी विद्यालयों और 200 कक्षाओं में किया गया। इस दौरान पहली और दूसरी कक्षा के 200 शिक्षकों की शिक्षण पद्धति का कक्षा अवलोकन, पाठ योजना, समय प्रबंधन तथा साक्षात्कार के माध्यम से अध्ययन किया गया।
रिपोर्ट में छह प्रमुख पहलुओं—कक्षा का वातावरण, पाठ योजना एवं अध्यापन, भाषा शिक्षण, गणित शिक्षण, कक्षा में समय का उपयोग तथा शिक्षकों की धारणा—का विस्तृत विश्लेषण किया गया है।
सर्वे में सामने आए सकारात्मक संकेत
रिपोर्ट के अनुसार उत्तर प्रदेश में आधारभूत शिक्षा को मजबूत करने की दिशा में कई सकारात्मक संकेत मिले हैं।
- 97 प्रतिशत कक्षाओं में ब्लैकबोर्ड कार्यशील मिले।
- 81 प्रतिशत शिक्षक बच्चों की मातृभाषा से परिचित पाए गए।
- 97 प्रतिशत शिक्षकों ने FLN प्रशिक्षण प्राप्त किया था और वे कम से कम एक शिक्षण परिणाम से परिचित थे।
- 94 प्रतिशत शिक्षकों को क्लस्टर एवं ब्लॉक रिसोर्स कोऑर्डिनेटर से शैक्षणिक सहयोग मिला।
- 78 प्रतिशत शिक्षक बच्चों के मूल्यांकन का लिखित रिकॉर्ड रखते पाए गए।
- शिक्षक क्लस्टर बैठकों में होगी रिपोर्ट पर चर्चा
अपर मुख्य सचिव पार्थसारथी सेन ने कहा कि राज्य परियोजना कार्यालय द्वारा जारी पत्र के अनुसार रिपोर्ट की 10 प्रमुख सिफारिशों पर आगामी टीचर क्लस्टर मीटिंग में अनिवार्य रूप से चर्चा की जाएगी। चर्चा के आधार पर कक्षाओं में इन्हें लागू करने की कार्ययोजना तैयार की जाएगी, ताकि विद्यार्थियों के सीखने के स्तर में सुधार लाया जा सके।
टाटा ट्रस्ट्स और एलएलएफ ने क्या कहा
टाटा ट्रस्ट्स की शिक्षा प्रमुख अमृता पटवर्धन ने कहा कि यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में प्रारंभिक कक्षाओं की वास्तविक स्थिति को समझने और शिक्षकों को आवश्यक शैक्षणिक सहयोग उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
वहीं लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन के संस्थापक एवं कार्यकारी निदेशक डॉ. धीर झिंगरन ने कहा कि बच्चों की सीखने की गुणवत्ता तभी सुधरेगी, जब प्रत्येक बच्चे को गुणवत्तापूर्ण, समावेशी और बाल-केंद्रित शिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि रिपोर्ट में सुझाई गई प्रक्रियाएं इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम हैं।
रिपोर्ट में शिक्षकों के निरंतर प्रशिक्षण, समावेशी कक्षा वातावरण, बेहतर पाठ योजना, विद्यार्थियों की सक्रिय भागीदारी, भाषा एवं गणित के इंटरैक्टिव शिक्षण और प्रभावी शैक्षणिक सहयोग को मजबूत करने की सिफारिश की गई है।
(स्रोत: लैंग्वेज एंड लर्निंग फाउंडेशन द्वारा जारी प्रेस विज्ञप्ति)




