✍️ सनी विश्राम सिंह
संपादक, पत्रकार सत्ता
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का सेशेल्स दौरा केवल एक औपचारिक राजकीय यात्रा नहीं, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की दीर्घकालिक सामरिक और कूटनीतिक नीति का महत्वपूर्ण हिस्सा है। ऐसे समय में जब हिंद महासागर वैश्विक शक्तियों की रणनीतिक प्रतिस्पर्धा का केंद्र बनता जा रहा है, भारत अपने समुद्री पड़ोसियों के साथ विश्वास और साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में लगातार सक्रिय दिखाई दे रहा है।
सेशेल्स भले ही क्षेत्रफल और जनसंख्या के लिहाज से छोटा देश हो, लेकिन उसकी भौगोलिक स्थिति उसे वैश्विक समुद्री व्यापार और सुरक्षा के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है। यही कारण है कि भारत और चीन सहित कई बड़े देश इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।
प्रधानमंत्री मोदी का राष्ट्रीय दिवस समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होना और सेशेल्स की संसद को संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बनना केवल एक कूटनीतिक सम्मान नहीं, बल्कि भारत के प्रति बढ़ते विश्वास का भी संकेत है।
इसे भी जानें- इमामबाड़े की चाबी पर हाई कोर्ट का बड़ा फैसला, जानिए पूरा मामला
भारत की ‘विजन MAHASAGAR’ नीति यदि पड़ोसी देशों के साथ विकास, समुद्री सुरक्षा और साझा समृद्धि के ठोस परिणामों में बदलती है, तो यह हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की भूमिका को और मजबूत करेगी।
भारत के लिए यह समय केवल संबंध बनाए रखने का नहीं, बल्कि उन्हें ठोस आर्थिक, तकनीकी और सामरिक सहयोग में बदलने का है। सेशेल्स दौरे का वास्तविक महत्व इसी कसौटी पर तय होगा।
✍️ लेखक: सनी विश्राम सिंह, संपादक, पत्रकार सत्ता। राष्ट्रीय राजनीति, विदेश नीति, शासन और समसामयिक विषयों पर नियमित विश्लेषणात्मक लेखन करते हैं।




