यूपी में अगले दो सप्ताह सामान्य से कम बारिश के आसार, किसानों को धान की बजाय श्री अन्न, मक्का और दलहनी फसलों की खेती की सलाह

यूपी मौसम आधारित कृषि परामर्श 2026

लखनऊ, (एस.वी.सिंह)। उत्तर प्रदेश में आगामी दो सप्ताह सामान्य से कम वर्षा होने की संभावना को देखते हुए कृषि वैज्ञानिकों ने किसानों को खेती की रणनीति बदलने की सलाह दी है। प्रदेश के वर्षा आधारित क्षेत्रों में इस बार धान की अपेक्षा श्री अन्न (मोटे अनाज), मक्का, उर्द, मूंग, तिल एवं अरहर जैसी कम पानी वाली फसलों की बुवाई को प्राथमिकता देने की अपील की गई है।

यह सलाह उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद के उप महानिदेशक डॉ. राजर्षि कुमार गौड़ की अध्यक्षता में 25 जून 2026 को आयोजित क्रॉप वेदर वॉच ग्रुप की वर्ष 2026-27 की चौथी बैठक में जारी मौसम आधारित कृषि परामर्श के तहत दी गई।

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बैठक में भारत मौसम विज्ञान विभाग से प्राप्त पूर्वानुमान के आधार पर बताया गया कि अगले 3-4 दिनों में दक्षिण-पश्चिम मानसून के उत्तर प्रदेश में आगे बढ़ने के लिए परिस्थितियां अनुकूल हैं। हालांकि 26 जून से 2 जुलाई तक पहले सप्ताह में 28 जून तक केवल छिटपुट वर्षा होने और 29 जून से वर्षा की गतिविधियों में वृद्धि होने की संभावना है। इसके बावजूद साप्ताहिक औसत वर्षा सामान्य से काफी कम रहने का अनुमान है।

दूसरे सप्ताह भी सामान्य से कम रहेगी बारिश

3 से 9 जुलाई के दौरान भी प्रदेश के अधिकांश हिस्सों में बारिश होने की संभावना है, लेकिन औसत वर्षा सामान्य से कम रहने का अनुमान है। इस दौरान अधिकतम एवं न्यूनतम तापमान सामान्य से 1 से 4 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रह सकता है, जिससे फसलों पर गर्मी का प्रभाव बढ़ने की आशंका जताई गई है।

लू, आंधी और वज्रपात की चेतावनी

कृषि वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि 28 जून तक पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में लू चल सकती है। वहीं 29 जून से मेघगर्जन, वज्रपात तथा 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ वर्षा होने की संभावना है। दूसरे सप्ताह में प्रदेश के दक्षिणी भाग में भी कुछ स्थानों पर लू की हल्की संभावना बनी रहेगी।

खरीफ बुवाई लक्ष्य का केवल 5.99 प्रतिशत पूरा

कृषि विभाग के अनुसार 23 जून 2026 तक प्रदेश में खरीफ फसलों के लिए निर्धारित 110 लाख हेक्टेयर लक्ष्य के मुकाबले केवल 6.63 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बुवाई हुई है, जो कुल लक्ष्य का मात्र 5.99 प्रतिशत है।

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किसानों के लिए प्रमुख कृषि सलाह

  • वर्षा आधारित खेती वाले किसान धान की बजाय श्री अन्न, मक्का, उर्द, मूंग एवं तिल की बुवाई को प्राथमिकता दें।
  • खेतों में वर्षा जल संरक्षण एवं जल संचयन के उपाय अपनाएं।
  • अरहर की बुवाई मेड़ों पर तथा कुंड एवं नाली विधि से करें।
  • धान की रोपाई वाले खेतों में ऊंची मेड़ बनाकर वर्षा जल का संरक्षण करें।
  • हरी खाद के लिए बोई गई सनई एवं ढैंचा की 40-42 दिन की फसल की पलटाई कर दें।
  • शोधित बीजों का ही प्रयोग करें तथा फॉस्फेटिक एवं जैविक उर्वरकों का उपयोग अवश्य करें।
  • धान की नर्सरी में पानी का ठहराव न होने दें।
  • खाली खेतों की गहरी जुताई कर खरपतवार एवं कीटों का नियंत्रण करें।
  • आम की फसल में फलमक्खी नियंत्रण के लिए मिथाइल यूजिनाल ट्रैप एवं नीम आधारित घोल का प्रयोग करें।
  • मत्स्य पालक तालाबों में कम से कम 1.50 मीटर जलस्तर बनाए रखें।
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पशुपालकों और किसानों के लिए भी विशेष सलाह

राष्ट्रीय पशुरोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत पशुओं में एच.एस. (हेमोरेजिक सेप्टीसीमिया) का टीकाकरण सभी जनपदों में निःशुल्क कराया जा रहा है। किसानों से इसका लाभ उठाने की अपील की गई है।

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इसके अलावा वित्तीय वर्ष 2026-27 में प्रदेश में 35 करोड़ पौधरोपण अभियान के तहत वन विभाग की पौधशालाओं से यूकेलिप्टस एवं पॉपलर को छोड़कर अन्य पौधे निःशुल्क उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

सचेत ऐप डाउनलोड करने की अपील

कृषि विशेषज्ञों ने किसानों से मोबाइल पर मिलने वाली मौसम चेतावनियों का पालन करने तथा ‘सचेत’ ऐप डाउनलोड करने की अपील की है। इस ऐप के माध्यम से किसानों को रियल-टाइम मौसम की जानकारी, आंधी, तूफान, बाढ़, बिजली गिरने जैसी आपदाओं की समय रहते सूचना प्राप्त हो सकेगी।

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