भारत में चीनी की किल्लत ने पाकिस्तान में जगाई उम्मीद, मिल मालिकों की नजर भारतीय बाजार पर

भारत ने चीनी आयात खोला तो पाकिस्तान में हलचल

10 लाख टन कच्ची चीनी ड्यूटी-फ्री आयात की भारत की मंजूरी के बाद पाकिस्तान की नजर भारतीय बाजार पर; लेकिन आयात प्रतिबंध बना बड़ी बाधा

पत्रकार सत्ता। बिज़नेस डेस्क
नई दिल्ली। घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए भारत सरकार के 10 लाख टन कच्ची चीनी को ड्यूटी-फ्री आयात करने के फैसले के बाद पाकिस्तान के चीनी उद्योग में भी हलचल तेज हो गई है। पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन से जुड़े लोगों ने अपनी सरकार से भारत को अतिरिक्त चीनी बेचने की संभावनाएं तलाशने की मांग की है।

पाकिस्तानी अखबार द न्यूज इंटरनेशनल की रिपोर्ट के अनुसार, चीनी उद्योग का मानना है कि भारत में आयात की मांग पैदा होने से पाकिस्तान के पास मौजूद अतिरिक्त स्टॉक के लिए नया बाजार मिल सकता है। पाकिस्तान शुगर मिल्स एसोसिएशन से जुड़े चौधरी मुहम्मद वहीद ने सरकार से इस संभावित अवसर की जांच करने का आग्रह किया है।

भारत ने चीनी आयात खोला तो पाकिस्तान में हलचल

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पाकिस्तान में 12 लाख टन से ज्यादा अतिरिक्त स्टॉक

पाकिस्तानी चीनी उद्योग के अनुसार वहां 12 लाख टन से ज्यादा चीनी का अतिरिक्त स्टॉक मौजूद है। अगला गन्ना पेराई सीजन नजदीक आने के कारण मिल मालिकों पर इस स्टॉक को निकालने का दबाव बढ़ रहा है।

उद्योग का कहना है कि अगर अगले सीजन में गन्ने की पैदावार अच्छी रहती है तो अतिरिक्त चीनी का भंडार और बढ़ सकता है। इससे मिलों की नकदी की स्थिति प्रभावित हो सकती है और किसानों को गन्ने का भुगतान करने में भी मुश्किल आ सकती है।

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पाकिस्तानी उद्योग का अनुमान है कि भारत को करीब 12 लाख टन चीनी निर्यात की अनुमति मिलने पर अतिरिक्त स्टॉक कम करने के साथ विदेशी मुद्रा आय भी बढ़ाई जा सकती है। हालांकि यह फिलहाल उद्योग की मांग और प्रस्ताव है, कोई भारत-पाकिस्तान व्यापार समझौता नहीं हुआ है।

भारत ने क्यों खोला आयात का रास्ता?

भारत में चीनी की कीमतें हाल के महीनों में तेजी से बढ़ी हैं। सरकार ने घरेलू आपूर्ति बढ़ाने और आगामी त्योहारी सीजन में कीमतों को नियंत्रित रखने के लिए 31 अक्टूबर 2026 तक 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है। यह करीब एक दशक बाद भारत द्वारा चीनी आयात की दिशा में उठाया गया बड़ा कदम है।

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सरकार ने बड़े थोक उपभोक्ताओं के लिए चीनी स्टॉक रखने की सीमा भी कड़ी की है, ताकि जमाखोरी और कृत्रिम कमी पर अंकुश लगाया जा सके।

लेकिन पाकिस्तान के लिए राह आसान नहीं

भारत में चीनी की मांग बढ़ने के बावजूद पाकिस्तान के लिए भारतीय बाजार तक पहुंचना सबसे बड़ी चुनौती व्यापार प्रतिबंध है।

भारत सरकार ने 2 मई 2025 से पाकिस्तान से उत्पन्न या पाकिस्तान से निर्यात की गई सभी वस्तुओं के प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष आयात और ट्रांजिट पर प्रतिबंध लगाया हुआ है। इसका अर्थ है कि केवल किसी तीसरे देश के रास्ते से भेजकर पाकिस्तान मूल की चीनी को भारत लाना भी मौजूदा नियमों के तहत प्रतिबंधित है, जब तक भारत सरकार कोई विशेष अनुमति न दे।

इस प्रतिबंध का हालिया उदाहरण भी सामने आया है। अगस्त 2026 में DRI ने पाकिस्तान मूल के 364 मीट्रिक टन सूखे खजूर की खेप पकड़ी थी, जिसे UAE के रास्ते भारत लाने और मूल देश छिपाने की कोशिश की गई थी। इससे साफ है कि तीसरे देश के जरिए पाकिस्तान मूल के सामान को भारत लाने पर भारतीय एजेंसियां कड़ी निगरानी रख रही हैं।

 

पाकिस्तान की उम्मीद, भारत का फैसला अहम

पाकिस्तानी चीनी उद्योग की मांग ऐसे समय आई है जब भारत ने घरेलू कीमतों को नियंत्रित करने के लिए विदेशी चीनी के लिए अस्थायी तौर पर बाजार खोला है। लेकिन भारत-पाकिस्तान व्यापार प्रतिबंध के कारण पाकिस्तान की चीनी को भारतीय बाजार में पहुंचने के लिए नई दिल्ली की विशेष अनुमति या नीति में बदलाव की जरूरत होगी।

इसलिए फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि पाकिस्तान की चीनी भारत आएगी। इतना जरूर है कि भारत के आयात निर्णय ने पाकिस्तान के अतिरिक्त चीनी स्टॉक की समस्या को लेकर वहां के मिल मालिकों को भारतीय बाजार की ओर देखने के लिए प्रेरित कर दिया है।

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