गोवंश भ्रूण प्रत्यारोपण तकनीक से नस्ल सुधार की दिशा में कदम, 15 हजार भ्रूण तैयार करने की योजना

बरेली में गोवंश नस्ल सुधार पर जोर

निर्भय सक्सेना । पत्रकार सत्ता
बरेली। पशुधन क्षेत्र में उन्नत आनुवंशिक तकनीकों के इस्तेमाल और गोवंश की नस्ल सुधार को लेकर बरेली स्थित लीड्स जेनेटिक्स ने ब्राजील के साथ तकनीकी सहयोग के आधार पर आगे बढ़ने की योजना बनाई है। कंपनी के अनुसार वर्ष 2027 तक करीब 15 हजार उन्नत गोवंश भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। इन भ्रूणों के प्रत्यारोपण से तैयार पशुओं में बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता विकसित होने की उम्मीद जताई गई है।

लीड्स कनेक्ट सर्विसेज और लीड्स जेनेटिक्स के ग्रुप चेयरमैन डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने बताया कि कंपनी अनुसंधान के माध्यम से देश में दूध उत्पादन, प्रजनन क्षमता और पशुपालकों के लिए आय के अवसर बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है। उन्होंने कहा कि बेहतर आनुवंशिक क्षमता वाले पशुओं में उचित पोषण, स्वास्थ्य देखभाल और वैज्ञानिक पशुपालन प्रबंधन मिलने पर प्रतिदिन 40 से 50 लीटर या उससे अधिक दूध उत्पादन की क्षमता विकसित हो सकती है। हालांकि वास्तविक दुग्ध उत्पादन पशु की नस्ल, आनुवंशिक क्षमता, पोषण, स्वास्थ्य और पशुपालन प्रबंधन सहित कई कारकों पर निर्भर करेगा।

गोवंश भ्रूण प्रत्यारोपण

2027 तक 15 हजार भ्रूण तैयार करने का लक्ष्य

कंपनी के मुताबिक लीड्स जेनेटिक्स का उद्देश्य उन्नत आनुवंशिक तकनीकों के माध्यम से देशी नस्लों की गुणवत्ता और उत्पादकता में सुधार करना है। इसके तहत एलीट बुल्स, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन जैसी तकनीकों के विकास पर भी काम किया जा रहा है।

डॉ. घनश्याम खंडेलवाल ने बताया कि उनके पुत्र आशीष खंडेलवाल सहित कंपनी के विशेषज्ञों ने ब्राजील में पशु आनुवंशिकी से जुड़ी तकनीकों और विशेषज्ञों के साथ काम किया है। कंपनी की योजना वर्ष 2030 तक करीब 250 करोड़ रुपये के निवेश के स्तर तक पहुंचने की है।

आयातित जर्मप्लाज्म पर निर्भरता कम करने का प्रयास

भारत विश्व में सबसे अधिक दूध उत्पादन करने वाले देशों में शामिल है, लेकिन प्रति पशु उत्पादकता बढ़ाना अभी भी एक महत्वपूर्ण चुनौती है। कंपनी का कहना है कि हाई-एंड जेनेटिक्स के क्षेत्र में भारत की आयात पर निर्भरता कम करने के लिए देश में ही उन्नत आनुवंशिक संसाधन विकसित करने की आवश्यकता है।

लीड्स जेनेटिक्स के अनुसार कंपनी एलीट बुल्स, भ्रूण और सेक्स्ड सीमेन के उत्पादन के साथ देशी गोवंश की आनुवंशिक क्षमता को मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कंपनी का मानना है कि बेहतर दुग्ध उत्पादन क्षमता से पशुपालन की आर्थिक दक्षता बढ़ाने और प्रति लीटर दूध उत्पादन से जुड़े पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में भी मदद मिल सकती है।

गोवंश भ्रूण प्रत्यारोपण

जीनोमिक तकनीक का प्रदर्शन

कार्यक्रम के दौरान कंपनी की ओर से ऑप्टिमाइज्ड बोवाइन एसएनपी चिप और इल्युमिना नोवासीक एक्स प्लेटफॉर्म पर नेक्स्ट जेनरेशन सीक्वेंसिंग का प्रदर्शन किया गया। कंपनी के अनुसार ये तकनीकें पशुओं की आनुवंशिक विशेषताओं के अध्ययन और चयन में उपयोगी हो सकती हैं।

भारत-ब्राजील आनुवंशिकी सहयोग को पशुधन क्षेत्र में तकनीकी साझेदारी की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया गया। कंपनी के मुताबिक विभिन्न राज्य सरकारों के साथ भी गोवंश नस्ल सुधार के लिए भ्रूण और अन्य आनुवंशिक तकनीक उपलब्ध कराने को लेकर बातचीत चल रही है।

कैटल समिट में साझा की गई तकनीकी जानकारी

बरेली स्थित अनुसंधान परिसर में आयोजित कैटल समिट में ब्राजील के भारत स्थित राजनयिक प्रतिनिधि, पशु नस्ल सुधार से जुड़े वैज्ञानिक, उत्तर प्रदेश के पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह, वन एवं पर्यावरण मंत्री डॉ. अरुण कुमार, मीरगंज विधायक डॉ. डीसी वर्मा, मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री राजेंद्र शुक्ला, किसान और अन्य संबंधित पक्ष शामिल हुए।

कार्यक्रम में कंपनी की ओर से जीनोम चिप और जेनेटिक चयन के माध्यम से विकसित गिर नस्ल के बछड़ों के जन्म का लाइव प्रसारण भी किया गया। कंपनी ने इसे भारत में स्वदेशी जीनोमिक क्षमता विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया।

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देश में स्वदेशी जीनोमिक क्षमता विकसित करने पर जोर

लीड्स जेनेटिक्स के सह-संस्थापक डॉ. आशीष दुबे ने कहा कि कंपनी का प्रयास भारत में स्वदेशी जीनोमिक क्षमता विकसित करने और आनुवंशिक प्रगति को व्यापक पशुधन आबादी तक पहुंचाने का है। उनका कहना है कि वैज्ञानिक तकनीकों के इस्तेमाल से पशु चयन की प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिल सकती है।

लीड्स जेनेटिक्स के अनुसार कंपनी जेनेटिक्स, जीनोमिक्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और उन्नत अनुसंधान के क्षेत्र में काम कर रही है। कंपनी पशु, पौधे और मानव जेनेटिक्स से जुड़े समाधान विकसित करने पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य जीनोमिक विज्ञान और एआई के उपयोग से उत्पादकता, स्वास्थ्य और स्थिरता से जुड़े बेहतर समाधान विकसित करना है।

बीएल एग्रो समूह से जुड़ी है कंपनी

बरेली स्थित बीएल एग्रो ग्रुप खाद्य उत्पादों, एग्री-टेक, अर्थ साइंसेज और डेयरी इनोवेशन सहित विभिन्न क्षेत्रों में काम करता है। समूह की प्रमुख कंपनी बीएल एग्रो इंडस्ट्रीज लिमिटेड के प्रमुख ब्रांडों में बैल कोल्हू और नॉरिश शामिल हैं।

समूह की सहायक कंपनियों में लीड्स कनेक्ट सर्विसेज और लीड्स जेनेटिक्स शामिल हैं। लीड्स कनेक्ट एग्री-टेक्नोलॉजी, डेटा एनालिसिस और रिस्क मैनेजमेंट के क्षेत्र में काम करती है, जबकि लीड्स जेनेटिक्स पशुधन सहित आनुवंशिक अनुसंधान और तकनीकी समाधानों पर केंद्रित है।

रिपोर्ट- निर्भय सक्सेना, बरेली ब्यूरो

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