NEET मुद्दे पर हंगामे के बीच मानसून सत्र लगभग वॉशआउट, जयराम रमेश बोले- 11 साल में कुछ नहीं बदला

मुख्य हेडलाइन: NEET मुद्दे पर संसद में हंगामा, जयराम रमेश बोले- 11 साल में कुछ नहीं बदला

पत्रकार सत्ता ब्यूरो
नई दिल्ली। संसद का मानसून सत्र 2026 गुरुवार को समाप्त हो गया। पूरे सत्र के दौरान विपक्ष और सरकार के बीच विभिन्न मुद्दों को लेकर लगातार गतिरोध और हंगामा देखने को मिला। कांग्रेस महासचिव (संचार) एवं राज्यसभा सांसद जयराम रमेश ने सत्र को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा कि यह मानसून सत्र पूरी तरह वॉशआउट हो गया और ऐसा पहली बार नहीं हुआ है।

जयराम रमेश ने 2015 के मानसून सत्र का हवाला देते हुए कहा कि 11 साल पहले भी संसद का मानसून सत्र इसी तरह बाधित हुआ था। तब व्यापम घोटाला बड़ा मुद्दा था और अब NEET से जुड़े पेपर लीक का मुद्दा संसद में प्रमुखता से उठाया गया। उनके मुताबिक इतने वर्षों बाद भी स्थिति में कोई बुनियादी बदलाव नहीं आया है।

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NEET मुद्दे पर सरकार को घेरता रहा विपक्ष

मानसून सत्र के दौरान विपक्षी दलों ने NEET से जुड़े कथित पेपर लीक, छात्रों के आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था से जुड़े सवालों पर सरकार से जवाब और चर्चा की मांग की। सत्र के अंतिम दिनों में भी सरकार और विपक्ष के बीच गतिरोध बना रहा और संसद की कार्यवाही बार-बार बाधित हुई। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक सत्र के अंतिम दिन दोनों सदनों में भी विरोध-प्रदर्शन और हंगामा जारी रहा।

हालांकि, आधिकारिक संसदीय कार्यक्रम के अनुसार 2026 का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक 19 बैठकों के लिए निर्धारित था। संसद की कार्यवाही पूरी तरह ठप नहीं रही और कुछ विधायी काम भी हुआ। इसलिए “पूर्ण वॉशआउट” का दावा कांग्रेस की राजनीतिक व्याख्या के रूप में देखा जाना चाहिए।

2015 में व्यापम और संसद में गतिरोध

2015 के मानसून सत्र में भी व्यापम मामले को लेकर विपक्ष ने सरकार पर तीखे हमले किए थे। संसदीय रिकॉर्ड के अनुसार विपक्ष ने दोनों सदनों में व्यापम से जुड़े मुद्दे उठाए और कई मौकों पर कार्यवाही बाधित हुई।

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13 अगस्त 2015 को तत्कालीन वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सत्र के समापन के बाद कहा था कि लगातार व्यवधान से संसद का कामकाज प्रभावित हुआ। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक उस समय राज्यसभा की उत्पादकता करीब 9 प्रतिशत और लोकसभा की करीब 60 प्रतिशत रही थी।

2026 में भी संसद के कामकाज पर सवाल

2026 के मानसून सत्र की शुरुआत से पहले सरकार की ओर से संसद को सुचारु रूप से चलाने और सार्थक चर्चा की अपील की गई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी सत्र की शुरुआत पर संसद के उत्पादक और सार्थक संचालन की उम्मीद जताई थी।

इसके बावजूद सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार टकराव बना रहा। अंतिम दिनों में सत्र के वॉशआउट की आशंका भी लगातार खबरों में रही।

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जयराम रमेश का हमला

कांग्रेस नेता जयराम रमेश का कहना है कि 2015 में व्यापम और 2026 में NEET मुद्दे के बीच 11 साल का अंतर जरूर है, लेकिन संसद में सरकार से जवाब मांगने और विपक्ष की मांगों को लेकर पैदा होने वाला गतिरोध आज भी कायम है। उनका यह बयान संसद की कार्यवाही को लेकर केंद्र सरकार पर कांग्रेस के राजनीतिक हमले का हिस्सा है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर संसद में सरकार और विपक्ष के बीच संवाद, महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों पर चर्चा तथा सदन के सुचारु संचालन को लेकर सवाल खड़े किए हैं।

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