अमेरिकी सीनेट में नया विधेयक आगे बढ़ा ऊर्जा व्यापार पर बन सकते हैं नए हालात
मुख्य बातें
● रूस से ऊर्जा खरीदने वाले देशों पर बढ़ेगा दबाव
● भारी आयात शुल्क लगाने का प्रस्ताव
● भारत और चीन भी दायरे में
● ऊर्जा आयात पर बढ़ सकती है चुनौती
नई दिल्ली। रूस से कच्चा तेल और प्राकृतिक गैस खरीदने वाले देशों पर आर्थिक दबाव बढ़ाने की दिशा में अमेरिका ने नया कदम उठाया है। अमेरिकी सीनेट के प्रभावशाली सांसदों ने रूस विरोधी नए प्रतिबंध विधेयक को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। यदि यह कानून लागू होता है तो भारत सहित कई देशों के ऊर्जा व्यापार पर इसका असर पड़ सकता है।
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संयुक्त बयान में कहा गया है कि यूक्रेन युद्ध के दौरान रूस की अर्थव्यवस्था को ऊर्जा कारोबार से मिलने वाली आय कम करने के लिए ऐसे देशों पर आर्थिक दबाव बनाया जाना जरूरी है जो अब भी रूस से तेल और गैस खरीद रहे हैं।प्रस्तावित विधेयक के अनुसार रूस से तेल प्राकृतिक गैस यूरेनियम अथवा अन्य पेट्रोलियम उत्पाद खरीदने वाले देशों से आने वाले सामान और सेवाओं पर भारी आयात शुल्क लगाया जा सकता है। शुरुआती मसौदे में पांच सौ प्रतिशत तक शुल्क लगाने का प्रावधान रखा गया था। हालांकि बाद में इसमें कुछ बदलाव किए जाने की चर्चा भी सामने आई है।
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भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा रूस से आयात करता है। ऐसे में यदि यह कानून प्रभावी होता है तो ऊर्जा आयात की लागत बढ़ सकती है। इससे व्यापार और आर्थिक गतिविधियों पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
फिलहाल यह केवल प्रस्तावित विधेयक है। इसे कानून बनने से पहले अमेरिकी संसद की आवश्यक प्रक्रिया से गुजरना होगा। इसके अंतिम स्वरूप और लागू होने की स्थिति पर भारत सहित कई देशों की नजर बनी हुई है।




