लखनऊ, (शबीह हैदर)। मुहर्रम का चांद दिखाई देने के साथ ही इस्लामी नववर्ष 1448 हिजरी का शुभारंभ हो गया है। चांद दिखने की पुष्टि के बाद मुहर्रम माह की पहली तारीख का ऐलान कर दिया गया है। इसके साथ ही देशभर में इबादत, मातमी कार्यक्रमों और यौमे आशूरा की तैयारियां तेज हो गई हैं। संबंधित धार्मिक संस्थाओं और चांद देखने वाली समितियों की घोषणा के अनुसार 27 जून को यौमे आशूरा (10 मुहर्रम) मनाया जाएगा।

मुहर्रम इस्लामी हिजरी कैलेंडर का पहला महीना है और इसे इस्लाम के चार पवित्र महीनों में शामिल किया जाता है। इस महीने का विशेष महत्व आध्यात्मिक चिंतन, संयम और इबादत से जुड़ा है। वहीं, 10 मुहर्रम यानी यौमे आशूरा का दिन विशेष रूप से हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में मनाया जाता है। इस अवसर पर विभिन्न स्थानों पर मजलिस, जुलूस और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
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धार्मिक संगठनों ने लोगों से मुहर्रम के दौरान शांति, सौहार्द और अनुशासन बनाए रखने की अपील की है। स्थानीय प्रशासन भी संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के लिए आवश्यक तैयारियों में जुट गया है, ताकि धार्मिक आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सकें।
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मुहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समुदाय के लोग इबादत, दुआ और सामाजिक सद्भाव के संदेश के साथ नए हिजरी वर्ष का स्वागत करते हैं। धार्मिक विद्वानों का कहना है कि यह महीना त्याग, धैर्य, न्याय और मानवता के मूल्यों को आत्मसात करने की प्रेरणा देता है।




