प्रकृति के देवता कर्मा की पूजा-अर्चना के बाद पारंपरिक परिधानों में थिरके आदिवासी समाज के लोग
निर्भय सक्सेना । पत्रकार सत्ता
बरेली। आदिवासी समाज ने कर्मा पूजा पारंपरिक रीति-रिवाज और उल्लास के साथ मनाई। कार्यक्रम में लोक संस्कृति, परंपरा और लोक संगीत का अनूठा संगम देखने को मिला। ढोल और पारंपरिक गीत-संगीत की धुनों के बीच कलाकारों ने आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक प्रस्तुत की।
आदिवासी उत्थान कल्याण समिति के तत्वावधान में राज कर्मा भादो एकादशी के अवसर पर बरेली में 30वां कर्मा पूजा समारोह आयोजित किया गया। समाज के लोगों ने प्रकृति के देवता कर्मा की विधिवत पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।

यह भी जानें- भारी बारिश के बीच अनवरत जारी रही श्रीमद्भागवत कथा, कृष्ण-रुक्मणी विवाह टला
पूजा के बाद आदिवासी समाज के लोगों ने पारंपरिक परिधान धारण कर लोक संगीत की धुनों पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया। उनकी प्रस्तुतियों ने समारोह में मौजूद लोगों का मन मोह लिया। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपजा प्रेस क्लब अध्यक्ष एवं उद्यमी डॉ. पवन सक्सेना ने कहा कि आदिवासी समाज देश की लोक संस्कृति और परंपराओं का महत्वपूर्ण संवाहक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज ने राष्ट्र निर्माण और विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। बरेली में रह रहा आदिवासी समाज अपनी परंपराओं और संस्कृति को जीवंत रखते हुए स्थानीय लोगों को भी समृद्ध लोक विरासत से परिचित करा रहा है।
इसे भी देखें- संवैधानिक संस्थाओं को राजनीतिक मुद्दा बनाकर भ्रम फैला रही कांग्रेस : उमेश गौतम
उन्होंने कहा कि बरेली के पूर्व केंद्रीय मंत्री संतोष कुमार गंगवार को राष्ट्रपति द्वारा झारखंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया है।
समारोह में आदिवासी उत्थान सेवा समिति की ओर से समाज के लिए उल्लेखनीय कार्य करने वाले लोगों को सम्मानित किया गया। इस अवसर पर बेलस खल्खो, अमोन लकड़ा, भद्र गुप्त, धमेश्वर, अर्जुन भगत, संजीव उरांव, सोने सिंह और बंसत लाल समेत समाज के कई लोग मौजूद रहे।
रिपोर्ट- निर्भय सक्सेना, बरेली ब्यूरो




