द्रशेखर आजाद ने जंतर मंतर पर फूंक दी आंदोलन में जान! NEET घोटाले का ‘चलो संसद’ अब निर्णायक मोड़ पर !

जंतर मंतर पहुंचे चंद्रशेखर आजाद नीट पेपर लीक आंदोलन में बढ़ी राजनीतिक सक्रियता

शबीह हैदर
नई दिल्ली। जंतर मंतर पर NEET पेपर लीक के खिलाफ शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजे की मांग को लेकर चल रहे धरने-प्रदर्शन और भूख हड़ताल में आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं सांसद चंद्रशेखर आजाद के मैदान में उतरने के बाद पूरा आंदोलन एक नई दिशा और गति पा गया है। पहले ऑनलाइन शुरू हुए और मुख्य रूप से युवा-छात्रों द्वारा संचालित ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के इस आंदोलन को चंद्रशेखर आजाद की सक्रिय भागीदारी ने राजनीतिक रंग और निर्णायक मोड़ दे दिया है। अब यह सिर्फ छात्र आंदोलन नहीं, बल्कि विपक्षी एकजुटता और सामाजिक न्याय का प्रतीक बनता जा रहा है।

आंदोलन की दिशा कैसे बदली?

सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके के नेतृत्व में शुरू हुआ यह आंदोलन शुरू में मुख्यतः छात्रों, युवाओं और कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं तक सीमित था। सोनम वांगचुक जैसे कार्यकर्ताओं की भूख हड़ताल ने इसे नैतिक बल दिया, लेकिन लाठीचार्ज, आंसू गैस और सामूहिक हिरासतों के बाद आंदोलन थोड़ा ढीला पड़ने लगा था। ठीक इसी मोड़ पर चंद्रशेखर आजाद का पहुंचना गेम चेंजर साबित हुआ।

उन्होंने न केवल प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े होकर पुलिस से आमने-सामने बहस की, बल्कि लाठीचार्ज के बाद जंतर मंतर पर कमान संभाली और लगातार डटे रहे। आजाद ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि “मिट्टी के ऋण चुकाने के लिए मैं यहां खड़ा हूं”। उनकी मौजूदगी से अन्य विपक्षी दलों, खासकर समाजवादी पार्टी (SP) के नेताओं की सक्रियता भी बढ़ गई। महुआ मोइत्रा, प्रकाश राज, शबाना आजमी जैसे चेहरे पहले से थे, लेकिन चंद्रशेखर आजाद के आने के बाद आंदोलन में बहुजन और दलित-बहुजन विंग की भागीदारी मजबूत हुई।

संसद में भी चंद्रशेखर आजाद ने NEET घोटाले और जंतर मंतर पर पुलिस कार्रवाई को प्रमुखता से उठाया। उन्होंने सदन में मुद्दा उठाया और विपक्ष की एकजुटता का संदेश दिया। यह सक्रियता CJP आंदोलन को सिर्फ जंतर मंतर तक सीमित रखने के बजाय संसद और सड़क दोनों मोर्चों पर ले आई है।

चंद्रशेखर की रणनीति: छात्र आंदोलन को जन-आंदोलन बनाना

चंद्रशेखर आजाद की इस भूमिका को राजनीतिक विश्लेषक “रणनीतिक दांव” मान रहे हैं। उन्होंने जंतर मंतर पर पहुंचकर न केवल छात्रों की आवाज बुलंद की, बल्कि इसे दलित, पिछड़े और वंचित वर्गों के व्यापक आंदोलन से जोड़ने की कोशिश की। उनकी मौजूदगी से आंदोलन में “जान फूंक” दी गई है और अब यह निर्णायक मोड़ की ओर बढ़ रहा है — जहां मांगें सिर्फ इस्तीफे तक नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में बड़े सुधार और जवाबदेही तक पहुंच सकती हैं।

आजाद ने प्रदर्शनकारियों से अपील की कि वे शांतिपूर्ण रहें लेकिन दबाव बनाए रखें। उनकी कमान संभालने के बाद आंदोलन में नई ऊर्जा आई है — लंगर, लस्सी और युवाओं का उत्साह देखा जा रहा है।

यूपी 2027 विधानसभा चुनाव में फायदा?
चंद्रशेखर आजाद की यह सक्रियता निस्संदेह उनके पार्टी के लिए 2027 उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ा राजनीतिक पूंजी जुटा रही है। आजाद समाज पार्टी पहले से ही पश्चिमी यूपी और दलित-बहुजन बेल्ट में अपनी पकड़ मजबूत कर रही है। चंद्रशेखर टिकट आकांक्षियों के साक्षात्कार स्वयं ले रहे हैं और बूथ स्तर तक संगठन खड़ा करने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।

संभावित फायदे:

दलित-बहुजन वोट बैंक का एकीकरण: NEET जैसे मुद्दे युवा और छात्र वर्ग को प्रभावित करते हैं। चंद्रशेखर की सक्रियता से युवा दलित-बहुजन वोटर उनके प्रति आकर्षित होंगे, जो BSP के पारंपरिक वोट बैंक को भी प्रभावित कर सकता है।

राष्ट्रीय छवि और युवा अपील: संसद और सड़क दोनों पर उनकी लड़ाई उन्हें “युवाओं का नेता” के रूप में स्थापित कर रही है। यह UP के अलावा अन्य राज्यों में भी ASP की ब्रांडिंग मजबूत करेगा। सामाजिक न्याय का नरेटिव: शिक्षा, बेरोजगारी और पेपर लीक जैसे मुद्दों को उठाकर आजाद “सामाजिक न्याय” का नया चेहरा बन गये हैं।

निर्णायक मोड़ की ओर

चंद्रशेखर आजाद ने जंतर मंतर के मैदान में आकर CJP आंदोलन में नई जान फूंक दी है। पहले छात्र-केंद्रित यह प्रदर्शन अब राजनीतिक रंग ले चुका है और निर्णायक दिशा की ओर बढ़ रहा है। उनके इस कदम से न केवल विपक्षी एकता मजबूत हुई है, बल्कि अपनी पार्टी को 2027 UP चुनाव के लिए मजबूत आधार मिल रहा है।

दिल्ली की गलियों में गूंज रहे नारों और संसद की बहस में उठते सवाल बता रहे हैं कि NEET घोटाला अब सिर्फ परीक्षा का मुद्दा नहीं, बल्कि युवा भारत की आकांक्षा और जवाबदेही का प्रतीक बन गया है। चंद्रशेखर आजाद की इस सक्रियता से साफ है — आंदोलन अब रुकने वाला नहीं, बल्कि और तेज होने वाला है।

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