Exclusive: ‘कांग्रेस’ से ‘आजाद’ होने की तैयारी में पूर्व मंत्री ‘मसूद अहमद’ !

कांग्रेस को लग सकता है पश्चिमी यूपी में बड़ा झटका

कांग्रेस को लग सकता है पश्चिमी यूपी में बड़ा झटका, पूर्व मंत्री मसूद अहमद आजाद समाज पार्टी में हो सकते हैं शामिल: सूत्र

शबीह हैदर
लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आ सकता है। पत्रकार सत्ता को मिली विश्वसनीय अंदरूनी जानकारी के अनुसार कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं पूर्व मंत्री मसूद अहमद जल्द ही कांग्रेस का साथ छोड़कर आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) का दामन थाम सकते हैं। पार्टी के भीतर चल रही राजनीतिक गतिविधियों से जुड़े सूत्रों का दावा है कि इस संबंध में बातचीत अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और औपचारिक घोषणा कभी भी हो सकती है।

हालांकि, इस संबंध में कांग्रेस, मसूद अहमद अथवा आजाद समाज पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है। पत्रकार सत्ता स्वतंत्र रूप से इस घटनाक्रम की पुष्टि करने का प्रयास कर रहा है।

कांग्रेस के लिए छह महीने में दूसरा बड़ा झटका?

कांग्रेस को लग सकता है पश्चिमी यूपी में बड़ा झटका
सपा नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी की फाइल फोटो

यदि मसूद अहमद का दल बदल होता है तो यह वर्ष 2026 में कांग्रेस के लिए दूसरा बड़ा राजनीतिक झटका माना जाएगा। इससे पहले वरिष्ठ नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी कांग्रेस छोड़कर समाजवादी पार्टी में शामिल हो चुके हैं। लगातार प्रभावशाली नेताओं के पार्टी से बाहर जाने की घटनाएं प्रदेश कांग्रेस के संगठनात्मक ढांचे और नेतृत्व क्षमता को लेकर नए सवाल खड़े कर रही हैं।

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में क्यों महत्वपूर्ण हैं मसूद अहमद?

राजनीतिक जानकारों के अनुसार मसूद अहमद लंबे समय से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की राजनीति में सक्रिय रहे हैं और मुस्लिम समाज के बीच उनकी पहचान रही है। यदि वह आजाद समाज पार्टी में शामिल होते हैं तो चंद्रशेखर आजाद को पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार का अवसर मिल सकता है।

आजाद समाज पार्टी पिछले कुछ वर्षों से दलित आधार के साथ-साथ मुस्लिम मतदाताओं के बीच भी अपनी राजनीतिक स्वीकार्यता बढ़ाने की कोशिश कर रही है। ऐसे में मसूद अहमद जैसे अनुभवी नेता का संभावित आगमन पार्टी की रणनीति को मजबूती दे सकता है।

चुनावी गणित क्या कहता है?

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में लगभग 140 से अधिक विधानसभा सीटें हैं। इस क्षेत्र की अनेक सीटों पर मुस्लिम और दलित मतदाता चुनावी परिणामों को प्रभावित करने की स्थिति में रहते हैं। यही कारण है कि भाजपा, समाजवादी पार्टी, राष्ट्रीय लोकदल, कांग्रेस और आजाद समाज पार्टी सभी इस क्षेत्र को अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र मानते हैं।

वर्ष 2022 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को उत्तर प्रदेश में लगभग 2.33 प्रतिशत वोट मिले थे और पार्टी केवल दो सीटों पर जीत दर्ज कर सकी थी। वहीं 2024 के लोकसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन के तहत कांग्रेस ने 6 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल कर अपनी स्थिति में कुछ सुधार किया।

ऐसे में यदि कांग्रेस का कोई प्रभावशाली क्षेत्रीय चेहरा पार्टी छोड़ता है तो इसका असर संगठन, कार्यकर्ताओं के मनोबल और स्थानीय चुनावी समीकरणों पर पड़ सकता है।

क्या बदलेंगे 2027 के समीकरण?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि किसी एक नेता के दल बदलने से चुनावी तस्वीर पूरी तरह नहीं बदलती, लेकिन यदि इसके बाद अन्य नेताओं का भी रुख बदलता है तो पश्चिमी उत्तर प्रदेश में नए राजनीतिक समीकरण उभर सकते हैं।

यदि मसूद अहमद वास्तव में आजाद समाज पार्टी में शामिल होते हैं तो यह चंद्रशेखर आजाद की उस रणनीति को मजबूती देगा, जिसके तहत वह दलित-मुस्लिम सामाजिक गठजोड़ को मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं। वहीं कांग्रेस के सामने संगठन को संभालने और नए नेतृत्व को आगे लाने की चुनौती और बढ़ सकती है।

आजाद समाज पार्टी को क्या मिलेगा?

आजाद समाज पार्टी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद पिछले कुछ वर्षों में दलित राजनीति के साथ-साथ मुस्लिम समाज के बीच भी अपनी स्वीकार्यता बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में उनकी नगीना लोकसभा सीट से जीत ने पार्टी को नई राजनीतिक पहचान दी।

मसूद अहमद जैसे अनुभवी नेता के शामिल होने से पार्टी को तीन स्तरों पर लाभ मिलने की संभावना मानी जा रही है—

  • पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन विस्तार।
  • मुस्लिम समाज के प्रभावशाली वर्ग तक पहुंच बढ़ाने का अवसर।
  • स्थानीय चुनावी प्रबंधन और उम्मीदवार चयन में अनुभवी नेतृत्व का सहयोग।

हालांकि, किसी भी दल बदल का वास्तविक राजनीतिक लाभ तभी दिखाई देता है जब संबंधित नेता अपने समर्थकों और बूथ स्तर के संगठन को भी नए दल के साथ जोड़ पाने में सफल हों

आधिकारिक घोषणा पर रहेगी नजर

फिलहाल राजनीतिक गलियारों में इस संभावित बदलाव को लेकर चर्चाएं तेज हैं। सभी की निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि क्या मसूद अहमद औपचारिक रूप से आजाद समाज पार्टी का दामन थामते हैं या घटनाक्रम अंतिम समय में नया मोड़ लेता है।

लेखक परिचय:
शबीह हैदर वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक हैं। वे पत्रकार सत्ता के लिए राजनीति और चुनावी मामलों पर विशेष लेख लिखते हैं।

 

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